सोमवार, 12 मई 2025

दुनिया में एक देश ऐसा है कि जिसका राष्ट्रीय ध्वज न चौकोर है और न ही आयताकार। इसके राष्ट्रीय ध्वज की क्या विशेषतायें हैं

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है। अगर आपने मेरे blog को follow नही किया है तो जल्दी से करे और जाने रोचक खबरों के बारे में।

यह देश नेपाल है।इसके राष्ट्रीय ध्वज में ऊपर-नीचे दो त्रिकोणीय आकृतियाँ है जिनका रंग लाल है परन्तु किनारे नीले हैं। ऊपरी त्रिकोण में अर्धचंद्र व नीचे के त्रिकोण में सूर्य की आकृति है । माना जाता है कि नीली किनारियाँ देश की शीतलता, लाल रंग इसके शौर्य व नक्षत्रों की उपस्थिति इसके दीर्घ इतिहास व भविष्य का संकेत देती है। वैसे लाल रंग नेपाल के राष्ट्रीय पुष्प गुराँस का भी है जिससे ध्वज के लाल रंग को इससे जोड़ कर देखा जाता है।

गंगा नदी से संबधित प्रमुख तथ्य


   नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है
       सनातन काल से भारत में प्रभावित हो रही और हिन्दू मतावलंबियों में ' देवी माँ ' की तरह पूजनीय गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड राज्य स्थित गोमुख हिमनद के निकट गंगोत्री ग्लेशियर से हुआ है । वहाँ से देव प्रयाग पहुंचने तक इसे भागीरथी के नाम से जाना जाता है । देव प्रयाग में आकार अलकनंदा नदी का इसमे संगम हो जाता है । वहाँ से दोनों नदियों की सम्मिलित धारा एक रूप  होकर गंगा नदी के रूप मे आगे बढ़ती है।
  गंगा नदी भारत के उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश , बिहार और पश्चिम बंगाल राज्यों मे प्रवाहित होती हुई पड़ोसी राष्ट्र बांगलादेश में जाती है और वहाँ पर ब्रम्हपुत्र से संगम के बाद बंगाल की खड़ी के सागर जल में विलीन हो जाती है । इस प्रकार इसकी कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है और भारत में इसकी लम्बाई 2510 किलोमीटर है । पश्चिम बंगाल में इसकी एक धारा को हुगली नाम से जाना जाता है और बांग्लादेश में प्रवेश करने पर इसका एक नया नाम मिलता है 'मेघना ' । भारत के प्रमुख धार्मिक  शहर गंगा नदी के तट पर बसे हुए है और औद्योगिक नगर भी । इसमे प्रमुख हैं - ऋषिकेश ,हरिद्वार , गढ़मुक्तेश्वर , मुरादाबाद , रामपुर , कानपुर , इलाहाबाद , वाराणसी , मिर्जापुर , पटना और पाकुर । 

क्या है PH मान, कैसे इसको हम परिभाषित कर सकते है

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है, आपने तो PH  के बारे में सुना ही होगा । साइंस में PH का क्या महत्व है आज हम इसके बारे में बात करते हैं
• इसका पूरा नाम पोटेंशियल ऑफ हाइड्रोजन हैं।
• 1909 ई• में सॉरेंसन ने एक नये स्केल को परिभाषित किया जो PH स्केल कहलाता है ।
•  इसका मापन PH द्वारा या विशेष सूचकों  के रंग परिवर्तन द्वारा किया जाता है।
•  इस मापक्रम में 1से 14 तक का ph माप ज्ञात कर सकते हैं।
• PH का मान 7 होने पर उदासीन,7 से कम होने पर अम्लीय तथा 7 से अधिक होने पर क्षारीय होता है।
      कुछ पदार्थों में PH का मान
•चुने का पानी                   10.5
•अंडे की सफ़ेदी/समुद्री       7.8
    जल
•दूध                                 6.8
•मानव लार                       6.4
•ब्लैक कॉफी                     5.0
•टमाटर का रस                  4.2
•मृदु पेय एवं सिरका            3.0
•नींबू का रस                      2.2

इतिहास के जन्म दाता कौन थे ?

  ➤  हेरोडोटस (Herodotus) , यूनान का प्रथम इतिहासकार व भूगोलवेत्ता था । हेरोडोटस का संस्कृत नाम हरिदत्त था । 
  ➤  हेरोडोटस हिस्ट्री (History) शब्द के प्रथम प्रयोगकर्ता थे । इन्होंने वास्तविक इतिहास लेखन की नींव रखी थी । 
  
 ➤  रोमन   दार्शनिक सिसरो ने हेरोडोटस को इतिहास का जनक / पिता  (Father Of History) की 
संज्ञा  दी 
  ➤ इन्होने अपने इतिहास का विषय पेलोपोनेसियन युद्ध को बनाया था । इनकी प्रसिद्ध पुस्तक  हिस्टोरीका (Historica) थी । 

शनिवार, 29 दिसंबर 2018

तेलंगाना के बारे में

तेलंगाना की राजधानीसबंधित जानकारी: वर्ष 1956 तक हैदराबाद एक राज्य था जब तक कि इसका आंध्रा प्रदेश में विलय नहीं हो गया हैदराबाद में बोली जाने वाली हिन्दी भाषा उत्तरी भारत में बोली जाने वाली हिन्दी से अलग है क्योंकि इसमें उर्दू तथा तेलुगु का मिश्रण है आन्ध्र प्रदेश की राजधानी होने के साथ ही इसे दस वर्ष तक तेलंगाना की सयुंक्त राजधानी भी घोषित किया जा चुका है इसके अतिरिक्त हैदराबाद, भारत का छठा सबसे अधिक जनसँख्या वाला शहर है बिज़नस स्कूल के क्षेत्र में हैदराबाद भारत में सर्वश्रेष्ठ है यहाँ आई.आई.टी. तथा बिट्स जैसे महविद्यालय स्थित हैं तथा फिल्म व्यापार क्षेत्र में भी हैदराबाद सबसे आगे हैं भारत के 29 वें राज्य के रूप में आंध्र प्रदेश से अलग होकर बने राज्य तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद को बनाया गया 2 जून 2014 को अस्तित्व में आया तेलंगाना 10 जिलों वाला राज्य है तथा हैदराबाद सयुंक्त रूप से आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना की राजधानी है जो कि वर्ष 2025 तक सयुंक्त रहेगी हैदराबाद तथा सिकंदराबाद को जुड़वां शहर के रूप में जाना जाता है हैदराबाद भारत के सर्वाधिक विकसित नगरों को सूची में आता है

बुधवार, 24 जनवरी 2018

*भारतीय नदी(INDIAN RIVERS)*

*1 सिन्धु नदी* :-
•लम्बाई: (2,880km)
• उद्गम स्थल: मानसरोवर झील के निकट
• सहायक नदी:(तिब्बत) सतलुज, व्यास,
झेलम, चिनाब,
रावी, शिंगार,
गिलगित, श्योक जम्मू और कश्मीर, लेह
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*2 झेलम नदी*
•लम्बाई: 720km
•उद्गम स्थल: शेषनाग झील,
जम्मू-कश्मीर
•सहायक नदी: किशन, गंगा, पुँछ लिदार,करेवाल,
सिंध जम्मू-कश्मीर,
कश्मीर
—————————————
*3 चिनाब नदी*
•लम्बाई: 1,180km
•उद्गम स्थल: बारालाचा दर्रे के निकट
•सहायक नदी: चन्द्रभागा जम्मू-कश्मीर
—————————————
*4 रावी नदी*
•लम्बाई: 725 km
•उद्गम स्थल:रोहतांग दर्रा,
कांगड़ा
•सहायक नदी :साहो, सुइल पंजाब
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*5 सतलुज नदी*
•लम्बाई: 1440 (1050)km •उद्गमस्थल:मानसरोवर के निकट राकसताल
•सहायक नदी : व्यास, स्पिती,
बस्पा हिमाचल प्रदेश, पंजाब
————————————
*6 व्यास नदी*
•लम्बाई: 470
•उद्गम स्थल: रोहतांग दर्रा •सहायक नदी:तीर्थन, पार्वती,
हुरला
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*7 गंगा नदी*
•लम्बाई :2,510 (2071)km •उद्गम स्थल: गंगोत्री के निकट गोमुख से
• सहायक नदी: यमुना, रामगंगा,
गोमती,
बागमती, गंडक,
कोसी,सोन,
अलकनंदा,
भागीरथी,
पिण्डार,
मंदाकिनी, उत्तरांचल,
उत्तर प्रदेश,
बिहार,
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*8 यमुना नदी*
•लम्बाई: 1375km
•उद्गम स्थल: यमुनोत्री ग्लेशियर
•सहायक नदी: चम्बल, बेतवा, केन,
टोंस, गिरी,
काली, सिंध,
आसन
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*9 रामगंगा नदी*
•लम्बाई: 690km
•उद्गम स्थल:नैनीताल के निकट एक हिमनदी से
• सहायक नदी:खोन
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*10 घाघरा नदी*
•लम्बाई: 1,080 km
•उद्गम स्थल:मप्सातुंग (नेपाल)
• सहायक नदी:हिमनद शारदा, करनली,
कुवाना, राप्ती,
चौकिया,
————————————–
*11 गंडक नदी*
•लम्बाई: 425km
•उद्गम स्थल: नेपाल तिब्बत सीमा पर मुस्ताग के निकट •सहायक नदी :काली गंडक,
त्रिशूल, गंगा
————————————–
*12 कोसी नदी*
•लम्बाई: 730km
•उद्गम स्थल: नेपाल में सप्तकोशिकी
(गोंसाईधाम)
•सहायक नदी: इन्द्रावती,
तामुर, अरुण,
कोसी
————————————–
*13 चम्बल नदी*
•लम्बाई: 960 km
•उद्गम स्थल:मऊ के निकट जानापाव पहाड़ी से
•सहायक नदी :काली सिंध,
सिप्ता,
पार्वती, बनास
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*14 बेतवा नदी*
•लम्बाई: 480km
•उद्गम स्थल: भोपाल के पास उबेदुल्ला गंज के पास मध्य प्रदेश
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*15 सोन नदी*
•लम्बाई: 770 km
•उद्गमस्थल:अमरकंटक की पहाड़ियों से
•सहायक नदी:रिहन्द, कुनहड़
—————————————
*16 दामोदर नदी*
•लम्बाई: 600km
•उद्गम स्थल: छोटा नागपुर पठार से दक्षिण पूर्व
•सहायक नदी:कोनार,
जामुनिया,
बराकर झारखण्ड,
पश्चिम बंगाल
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*17 ब्रह्मपुत्र नदी*
•लम्बाई: 2,880km
•उद्गम स्थल: मानसरोवर झील के निकट (तिब्बत में सांग्पो)
•सहायक नदी: घनसिरी,
कपिली,
सुवनसिती,
मानस, लोहित,
नोवा, पद्मा,
दिहांग अरुणाचल प्रदेश, असम
————————————
*18 महानदी*
•लम्बाई: 890km
•उद्गम स्थल: सिहावा के निकट रायपुर
•सहायक नदी: सियोनाथ,
हसदेव, उंग, ईब,
ब्राह्मणी,
वैतरणी मध्य प्रदेश,
छत्तीसगढ़,
उड़ीसा
————————————–
*19 वैतरणी नदी*
• लम्बाई: 333km
•उद्गम स्थल:क्योंझर पठार उड़ीसा
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*20 स्वर्ण रेखा*
•लम्बाई: 480km
•उद्गम स्थल ;छोटा नागपुर पठार उड़ीसा,
झारखण्ड,
पश्चिम बंगाल
—————————————*21 गोदावरी नदी*
•लम्बाई: 1,450km
•उद्गम स्थल: नासिक की पहाड़ियों से
•सहायक नदी:प्राणहिता,
पेनगंगा, वर्धा,
वेनगंगा,
इन्द्रावती,
मंजीरा, पुरना महाराष्ट्र,
कर्नाटक,
आन्ध्र प्रदेश
———–;;—;——————–
*22 कृष्णा नदी*
•लम्बाई: 1,290km
•उद्गम स्थल: महाबलेश्वर के निकट
•सहायक नदी: कोयना, यरला,
वर्णा, पंचगंगा,
दूधगंगा,
घाटप्रभा,
मालप्रभा,
भीमा, तुंगप्रभा,
मूसी महाराष्ट्र,
कर्नाटक,
आन्ध्र प्रदेश
—————————————
*23 कावेरी नदी*
•लम्बाई: 760km
•उद्गम स्थल: केरकारा के निकट ब्रह्मगिरी
•सहायक नदी:हेमावती,
लोकपावना,
शिमला, भवानी,
अमरावती,
स्वर्णवती कर्नाटक,
तमिलनाडु
—————————————
*24 नर्मदा नदी*
•लम्बाई: 1,312km
•उद्गम स्थल :अमरकंटक चोटी
•सहायक नदी: तवा, शेर, शक्कर,
दूधी, बर्ना मध्य प्रदेश,
गुजरात
————————————–
*25 ताप्ती नदी*
•लम्बाई: 724km
•उद्गम स्थल: मुल्ताई से (बेतूल)
•सहायक नदी: पूरणा, बेतूल,
गंजल, गोमई मध्य प्रदेश,
गुजरात
—————————————
*26 साबरमती*
•लम्बाई: 716km
•उद्गम स्थल: जयसमंद झील
(उदयपुर)
•सहायक नदी:वाकल, हाथमती राजस्थान,
गुजरात
————————————-
*27 लूनी नदी*
•उद्गम स्थल: नाग पहाड़ •सहायक नदी:सुकड़ी, जनाई,
बांडी राजस्थान,
गुजरात,
मिरूडी,
जोजरी
————————————–
*28 बनास नदी*
•उद्गम स्थल: खमनौर पहाड़ियों से
•सहायक नदी :सोड्रा, मौसी,
खारी कर्नाटक,
तमिलनाडु
—————————————
*29 माही नदी*
•उद्गम स्थल: मेहद झील से •सहायक नदी:सोम, जोखम,
अनास, सोरन मध्य प्रदेश,
गुजरात
—————————————
*30 हुगली नदी*
•उद्गम स्थल: नवद्वीप के निकट
•सहायक नदी: जलांगी
—————————————

बुधवार, 17 जनवरी 2018

नाथ संप्रदाय के बारे मे


                                              नाथ समप्रदय 
                                                                      

➤ नाथ संप्रदाय की स्थापना 10वीं  शताब्दी मे म्त्स्येन्द्रनाथ ने की थी । इस संप्रदाय मे शिव को आदिनाथ  मानते हुए 9 नाथों को दिव्य को पुरुष के रूप में मान्यता प्रदान की गई है । म्त्स्येन्द्रनाथ के ग्रंथो कौलज्ञान निर्णय और अकुलवीरतंत्र में इस सिद्धांत की विस्तृत चर्चा की गई है ।

➤ इस सिद्धान्त के अनुसार शिव का नाम अकु है तथा उसकी शक्ति का नाम कुल है । इन दोनों के संयोग से सृष्टि होती है । ऐसी स्थिति में इस साधना का समस्त कार्य स्त्री को साथ रखकर सम्पन्न किया जाता है । म्त्स्येन्द्रनाथ की यह साधना वज्रयानी बौद्धो की साधना के समतुल्य हैं इसलिए म्त्स्येन्द्रनाथ को अवलोकितेश्वर के अवतार के रूप में माना गया है और तिब्बत में इन्हें सिद्धालुईपाद के रूप में जाना जाता है । 

➤  बाबा गोरखनाथ : 11वीं शताब्दी में नाथपंथ संप्रदाय के प्रचार - प्रसार का कार्य बाबा गोरखनाथ ने किया । उन्होने साधना में स्त्रियों के प्रवेश का विरोध किया और कहा कि इनके संयोग व संसर्ग से साधना संभव नहीं है । इन्होने सच्चरित्रता व जीवन कि पवित्रता पर बल दिया । इनके अनुसार शिव की परमतत्व है । जब उसकी सृष्टि की इच्छा होती है तब यह शक्ति के रूप में परिवर्तित हो जाता है । इनके हठयोग व सहजयान योग का तत्कालीन समाज में तीव्रता से प्रचार हुआ ।   

बुधवार, 10 जनवरी 2018

सूखे ने जिन मवेशियों का सब कुछ छीन लिया


देश के जिन इलाकों में सूखे ने दस्तक दे दी है और खेत सूखने के बाद किसानों व खेत-मजदूरों के परिवार पलायन कर गए हैं, वहां छुट्टा मवेशियों की तादाद सबसे ज्यादा है। इनके लिए पीने के पानी की व्यवस्था का गणित अलग ही है। आए रोज गांव-गांव में कई-कई दिनों तक चारा न मिलने या पानी न मिलने या फिर इसके कारण भड़ककर हाईवे पर आने से होने वाली दुर्घटनाओं के चलते मवेशी मर रहे हैं। गरमी के दिन तो और भी बदतर होंगे, क्योंकि तापमान भी बढ़ेगा। बुंदेलखंड में लोगों ने अपने मवेशियों को खुला छोड़ दिया है, क्योंकि चारे व पानी की व्यवस्था वे नहीं कर सकते। इसे वहां पर ‘अन्ना प्रथा’ कहा जाता है। सैकड़ों मवेशियों ने अपना बसेरा सड़कों पर बना लिया। पिछले दिनों ऐसे कोई पांच हजार मवेशियों का रेला हमीरपुर से महोबा जिले की सीमा में घुसा, तो किसानों ने रास्ता जाम कर दिया। इन जानवरों को हमीरपुर जिले के राठ के बीएनबी कॉलेज परिसर में घेरा गया था और योजना के अनुसार पुलिस की अभिरक्षा में इन्हें रात में चुपके से महोबा जिले में खदेड़ना था। एक तरफ पुलिस, दूसरी तरफ सशस्त्र गांव वाले और बीच में हजारों मवेशी। कई घंटे तनाव के बाद जब जिला प्रशसन ने इन गायों को जंगल में भेजने की बात मानी, तब तनाव कम हुआ। उधर बांदा जिले के कई गांवों में अन्ना पशुओं को लेकर हो रहे तनाव से निपटने के लिए प्रशासन ने बेआसरा पशुओं को स्कूलों के परिसर में घेरना शुरू कर दिया है। इससे कई जगहों पर पढ़ाई चौपट हो गई है। प्रशासन के पास इतना बजट नहीं है कि उनके लिए हर दिन चारे-पानी की व्यवस्था की जाए। किसानों के लिए ये मवेशी परेशानी का सबब हैं, क्योंकि ये उनकी खेतों में लहलहा रही फसलों को चट कर जाते हैं।

पिछले दो दशकों से मध्य भारत का अधिकांश हिस्सा तीन साल में एक बार अल्प वर्षा का शिकार रहा है। यहां से रोजगार के लिए पलायन की परंपरा भी एक सदी से ज्यादा पुरानी है, लेकिन मवेशियों को मजबूरी में छुट्टा छोड़ देने का रोग अभी कुछ दशक से ही है। ‘अन्ना प्रथा’ यानी अनुपयोगी मवेशी को आवारा छोड़ देने के चलते यहां खेत व इंसान, दोनों पर संकट है। उरई, झांसी आदि जिलों में कई ऐसे किसान हैं, जिनके पास अपने जल ससांधन हैं, लेकिन वे अन्ना पशुओं के कारण बुवाई नहीं कर पाए। जब फसल कुछ हरी होती है, तो अचानक ही हजारों मवेशियों का रेवड़ आता है और फसल चट कर जाता है। इसी के साथ जुड़ी हुई राजनीति की समस्याएं भी बहुत सारी हैं।

अभी चार दशक पहले तक हर गांव में चरागाह की जमीन होती थी। शायद ही कोई ऐसा गांव या मजरा होगा, जहां कम से कम एक तालाब और कई कुएं न हों। जंगल का फैलाव पचास फीसदी तक था। आधुनिकता की आंधी में बहकर लोगों ने चरागाह को अपना ‘चरागाह’ बना लिया व हड़प गए। तालाबों की जमीन समतल करके या फिर घर की नाली और गंदगी उनमें गिराकर उनका अस्तित्व खत्म कर दिया गया। हैंडपंप या ट्यूबवेल की मृग-मरीचिका में कुओं को बिसरा दिया। जंगलों की ऐसी कटाई हुई कि अब बुंदेलखंड में अंतिम संस्कार के लिए भी लकड़ी नहीं बची है और वन विभाग के डिपो दूर से लकड़ी मंगवा रहे हैं। जो कुछ जंगल बचे भी हैं, वहां पर मवेशियों के चरने पर रोक है।

अभी बरसात बहुत दूर है। जब सूखे का संकट चरम पर होगा, तो लोगों को मुआवजा, राहत कार्य या ऐसे ही नामों पर राशि बांटी जाएगी, लेकिन देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पशु-धन को सहेजने के प्रति शायद ही किसी का ध्यान जाए। अभी तो औसत या अल्प बारिश के चलते जमीन पर थोड़ी हरियाली है और कहीं-कहीं पानी भी, लेकिन अगली बारिश होने में अभी कम से कम तीन महीने हैं और इतने लंबे समय तक आधे पेट व प्यासे रहकर मवेशियों का जी पाना संभव नहीं होगा। बुंदेलखंड में जीविकोपार्जन का एकमात्र जरिया खेती ही है और मवेशी पालन इसका सहायक व्यवसाय। यह जान लें कि एक करोड़ से ज्यादा संख्या का पशु धन तैयार करने में कई साल व कई अरब की रकम लगेगी, लेकिन उनके चारा-पानी की व्यवस्था के लिए कुछ करोड़ ही काफी होंगे।

मंगलवार, 9 जनवरी 2018

जापानी इन्सेफेलाइटिस वाइरस का यू पी और बिहार पर खतरनाक प्रकोप

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है अगर आपने मेरे इस Blog को Follow नहीं किया है तो जल्दी से Follow करे
जापानी इन्सेफेलाइटिस रोग वाइरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से होता है | यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है | यह एक खास प्रकार के वायरस के द्वारा फैलाता है जापानी इन्सेफेलाइटिस मच्छरों और सूअर के द्वारा फैलाता है | इस बुखार को फैलाने में सूअर मुख्य भूमिका निभाता है | इस बुखार की चपेट मे 1 से 14 साल के बच्चे एवं 65 वर्ष के ऊपर के लोग इसकी चपेट में आते है | लेकिन इस जानलेवा बीमारी के शिकार अधिकतर बच्चे ही होते हैं | जापानी इन्सेफेलाइटिस के वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है | यह छूआछूत की बीमारी नहीं है | जापानी इन्सेफेलाइटिस वायरस को फैलाने में मच्छरों और सूअरो की मुख्य भूमिका होती है देश के 19 राज्यो के 171 जिलों मे जापानी इन्सेफेलाइटिस का प्रभाव है | पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार सहित दूसरे अन्य राज्यो के 60 जिले इन्सेफेलाइटिस से प्रभावित हैं | हर वर्ष यूपी
और बिहार में जापानी इन्सेफेलाइटिस से सैकड़ो बच्चों की अकाल मृत्यु हो जाती है | पिछले दिनों पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस दिमागी बुकर से सैकड़ो की संख्या में बच्चों की मृत्यु हो गयी |जापानी इन्सेफेलाइटिस का प्रकोप साल के तीन महीने अगस्त,सितंबर और अक्तूबर में सबसे ज्यादा होता है | जापानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण हैं सिरदर्द ,तेज बुखार,गर्दन मे अकड़न ,घबराहट ,ऐंठन और मस्तिष्क भी निष्क्रिय हो जाता है । इस बुखार की संचयी कालवधि समान्यतः 5 से 15 दिन होती है | और इसकी मृत्युदर 0.3 से 60 प्रतिशत तक है । जापानी इन्सेफेलाइटिस वायरस सूअर के शरीर में फलते-फूलते हैं और उनसे मच्छर इस वायरस को मानव शरीर में पहुंचाने का काम करते हैं । वायरस हमारे शरीर के संपर्क में आते ही सीधा हमारे दिमाग में प्रवेश कर लेता है और हमारे सोचने समझने,देखने और सुनने की शक्ति को प्रभावित करता है । इसकी कोई विशेष चिकित्सा नहीं है । यह रोग अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर होता है । ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगो लो दिमागी बुखार होने की अधिक संभावना रहती है । भारत में जापानी इन्सेफेलाइटिस टीका उपलब्ध है । इस बुखार से बचने के लिए कुछ सुझाव है । समय से टीकाकरण कराएं, साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें, मच्छरों को अपने आस-पास पनपने न दें, घरों के आस-पास पानी जमा न होने दें, बच्चों के खान पान पर विशेष ध्यान दें ।

बुधवार, 3 जनवरी 2018

अब आपकी कलम चार्जर तथा कैमरे का भी काम करेगी जाने कैसे

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है।
प्रागैतिहासिक काल से आज तक कलम ने काफी लम्बी विकास यात्रा तय की है जिसमें सरकंडे से निर्मित कलम से लेकर आधुनिक वॉल पेन तक शामिल हैं।अब कनाडा के कुछ शोधकर्ताओं ने एक ऐसी कलाम का निर्माण किया है ।  लेखन के साथ-साथ चार्जर तथा कैमरे का भी काम करेगी। इस बहुपयोगी कलम का नाम रखा गया है'चार्ज राइट' । इस अनोखी कलम का मूल्य है लगभग एक हजार रुपये । यह कलम आपके फोन को पाँच घंटे तक उपयोग के लायक चार्ज कर सकती है। इस कलम में156 जी बी मैमोरी कार्ड लगा हुआ है।इस कलम को फोन के अलावा लैपटॉप से भी जोड़ा जा सकता है। इस कलम की नोक पर कैमरा भी लगा है ।
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दुबलापन से रहता है अवसाद का सबसे ज्यादा खतरा

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है
प्रायः पाया जाता है की मोटोपा और कुपोषण अवसाद के कारण पनपते हैं, परन्तु हाल के वैज्ञानिक शोधों से ये पता चला है की बहुत दुबली – पतली महिलायें भी पुरुषों की तुलना मेन अवसाद के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती हैं | पाया गया है कि मानसिक तनाव पर दुबलेपन का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है | दक्षिण कोरिया के सिओल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने पतली महिलाओं और पुरुषों कि नकारात्मक सोच पर अध्ययन किया और निष्कर्ष निकाला कि मोटे लोगों में अवसाद के विपरीत पतली महिलाओं में इसकी संभावना अधिक रहती है | ब्रिटेन के जर्नल ऑफ साइकेट्री में प्रकाशित एक शोध पत्र में बताया गया है कि अवसादग्रस्त होने पर वजन घट सकता है या यह हो सकता है कि पतला होने से अवसाद का खतरा बढ़ता हो | शोधकर्ताओं के मतानुसार समकक्ष पुरुष से बार–बार पतली महिलाओं की तुलना होने की वजह से उन्हें मनोवैज्ञानिक संकट का सामना करना पड़ता है जो बाद में अवसाद का कारण बन सकता है | शोधकर्ताओं ने 183 महिलाओं पर अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला की कम वजन वलले तथा मोटापाग्रस्त दोनों प्रकार के लोगों में अवसाद का जोखिम अधिक रहता है |

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

रोहित बन गये भारत में t20 के सबसे तेज़ शतक बनाने वाले बल्लेबाज

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है। अगर आपने मेरे blog को follow नही किया है तो जल्दी से करे और जाने रोचक खबरों के बारे में
भारत के रोहित ने बैटिंग में तहलका मचा दिया उन्होंने श्रीलंका के छक्के छुड़ा दिए है। रोहित ने दक्षिण अफ्रीका धांसू बल्लेबाज डेविड मिलर की बराबरी कर दी है।
दक्षिण अफ्रीका के धांसू बल्लेबाज डेविड मिलर ने बांग्लादेश के खिलाफ केवल 35 गेंदों पर शतक बनाकर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज सैकड़े का नया रिकार्ड बनाया। मिलर ने 36 गेंदों पर सात चौकों और नौ छक्कों की मदद से नाबाद 101 रन बनाये और इस बीच केवल 35 गेंदों पर शतक बनाकर हमवतन रिचर्ड लेवी के 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाये गये 45 गेंदों में शतक के रिकार्ड को तोड़ा। मिलर का साथ दे रहे है रोहित शर्मा जिन्होंने 35 गेंदों 101 रन बनाये ।इन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 22 दिसम्बर 2017 को बनाया है। जिसमे रोहित 11 चौके और 8 छक्के मारे है।भारत का t20 सबसे टॉप के बल्लेबाज बन गए ।

गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

आश्रय प्रदान करने वाली ताजे पानी की सबसे बड़ी झील

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है। अगर आपने मेरे blog को follow नही किया है तो जल्दी से करे और जाने रोचक खबरों के बारे में।
लोकटक झील पूर्वोत्तर की ताजे पानी की सबसे बड़ी झील है। लोकटक झील की फ्लोटिंग प्रकृति के कारण इसको 'फ्लोटिंग लेक' कहा जाता है। यह विशेष झील इम्फाल से करीब 53 की.मी. दूर विशुपुर जिले में स्थित है। इसके निरंतर बहते रहने के कारण इसे स्थानीय भाषा में 'फ़्यूमिड्स' कहते हैं। फ़्यूमिड्स के चारों तरफ की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ होती है।यह लगभग 300 वर्गमीटर के क्षेत्रफल में फैली हुई है।इसका उपयोग बहुत बड़ी संख्या में लोगों की जीविका के रूप में किया जा रहा है। यह जल ,बिजली के उत्पादन, सिंचाई तथा आस-पास के क्षेत्रों में पीने योग्य जल की आपूर्ति तथा विभिन्न मछुआरों के लिए आमदनी का स्रोत है। लोकटक झील जैवविविधता की दृष्टि से अत्यंत सम्पन्न है।लोकटक झील जैवविविधता की दृष्टि से अत्यंत सम्पन्न है। यह जल में पाए जाने वाले पक्षियों एवं जीव जन्तुओं के लिए एक विशेष आश्रय प्रदान करती है।

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

कान के ऊतक से बने शुक्राणुओं से दूर होगी नपुंसकता

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ब्रिटेन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने कान के ऊतकों से शुक्राणु कोशिकाएं बनाने में सफलता पाई है। इस तकनीक के जरिए पुरुषों में नपुंसकता की समस्या का निदान सम्भव होगा।साइंस जर्नल में प्रकाशित इस शोध में शोधकर्ताओं ने अतिरिक्त क्रोमोसोम को अलग कर स्वस्थ बच्चे पैदा करने की संभावनाएँ जगाई हैं। यही अतिरिक्त क्रोमोसोम ही पुरुषों में नपुंसकता का कारण होता है।
शोधकर्ताओं ने 2 एक्स 1 वाई और 1 एक्स  2 वाई क्रोमोसोम वाले चूहे के कान के ऊतकों का छोटा हिस्सा लिया। उससे फाइब्रोब्लास्ट नामक कोशिकाएँ निकलीं।फिर उन्होंने फाइब्रोब्लास्ट को मूल कोशिकाओं में बदला । इस प्रक्रिया में उन्हें अतिरिक्त क्रोमोसोम के स्वतः गायब हो जाने की जानकारी मिली।
शोधकर्ताओं के अनुसार अगर यह तकनीक 2 एक्स 1 वाई और 1 एक्स 2 वाई क्रोमोसोम वाले पुरुषों में सुरक्षित रूप में इस्तेमाल की जाए तो इसकी मदद से वह बच्चे पैदा कर सकने में सक्षम होंगे। अभी तक शरीर से बाहर परिपक्व शुक्राणु बनाने की कोई भी तकनीक नहीं है। लेकिन इस शोध में ऐसा करने की कोशिश की गई।

शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

एक रुपये के नोट से सम्बंधित प्रमुख तथ्य

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है ।अगर आपने मेरे इस ब्लॉग को फॉलो नहीं किया है तो जल्दी फॉलो करें और जाने नये,पुराने और रहस्यमयी खबरों के बारे में।
•    30 नवंबर 1917 को पहली बार प्रिंट किए गये ।
•    एक रुपये के नोट पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम की                    तस्वीर छपी थी ।
•    वर्ष 1917 से 1927 तक 125 प्रकार के 1 रुपये के नोट प्रिंट किये गये ।
•    1 रुपये के इस नोट का डिजाईन पिछले 100 वर्षों में 28 बार परिवर्तित किया गया ।
•    पहली बार छपकर आये 1 रुपये के नोट पर तीन वित्त सचिवों एम एम एस गब्बे, एसी मैकवाटर्स तथा एच डेनिंग के हस्ताक्षर थे।
•    स्वतंत्रता के पश्चात् 1 रुपये के नोट पर जॉर्ज पंचम के स्थान पर अशोक चिन्ह प्रकाशित किया जाने लगा।
•    1947 से अब तक 18 वित्त सचिवों के हस्ताक्षर वाले एक रुपये के नोट जारी किए गए हैं।
•    अन्य नोटों की तरह इसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नहीं बल्कि सीधे भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है।
•    कानूनी आधार पर 1 रुपये का नोट ही वास्तविक ‘मुद्रा’ नोट (करेंसी नोट) है बाकी सभी नोट धारीय नोट (प्रॉमिसरी नोट) होते हैं जिस पर धारक को उतनी राशि अदा करने का वचन दिया गया होता है।

सोमवार, 4 दिसंबर 2017

वह कौन सा जानवर था जिससे सबसे पहले अंतिरिक्ष यात्रा की

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है । आज का हमारा टॉपिक हैं कि वह कौन-सा जानवर था जिसने अंतिरक्ष का सफर तय किया।
3 नवम्बर, 1957 को रूस ने अपना दूसरा उपग्रह 'स्पूतनिक-2' अंतिरक्ष में भेजा । इस उपग्रह में 'लइका' नामक कुतिया सवार थी ।लाइका कुत्तिया मोस्को की गलियों से लायी गयी थी । लाइका को इस काम के लिए एक अलग से ट्रेनिंग दी गयी थी । ताकि वह वहा पर बिना किसी परेशानी से पहुच सके। यह लिटिल लाइका मिशन अंतरिक्ष में किसी जिव के रहने वाले प्रभावों को जानने के लिए था । इसलिए लाइका जीवित नही रहेगी इसकी उम्मीद कम थी । उपग्रह की 54 परिक्रमाओं तक वह जीवित रही और उड़ान भरने के 100 घंटे बाद वह मर गई। इससे इस बात का प्रमाण मिल गया कि अंतिरक्ष की भारहीन परिस्थितियों में आदमी रह सकता है।

गुरुवार, 30 नवंबर 2017

विश्व की सबसे तेज भागने वाली Bike जो न्यूक्लियर बम को भी पीछे छोड़ सकती हैं

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत हैं ।
  आज हमारा टॉपिक है, सबसे महंगी और  स्पीड धारक बाइक आपने तो बहुत सी बाइकों को चलाया होगा लेकिन आज मैं जिस बाइक के बारे में बात करने जा रहा हूँ।शायद ही आपने उसको देखा भी होगा। पर हा आपने उस बाइक जैसे या कह सकते है कि उसका डेमो को फिल्मो में जरूर देखा होगा। इस बाइक के बारे में मुझे भी ज्यादा पता नही पर जो मालूम है उसको आपसे शेयर कर रहा हूँ।
इस बाइक का नाम है - Dodge Tomahawk V10
इसका दाम- 5,50,000 डॉलर

ये एक कांसेप्ट सुपरबाइक है जो 0 से 60 सिर्फ़ 2.50 सेकंड्स में जा सकती है. इसकी टॉप स्पीड 300 मील प्रति घंटे की है. मतलब इस बाइक से आप एक न्यूक्लिअर धमाके को पीछे छोड़ सकते हो, लेकिन अफ़सोस इस बाइक को चलाना गैरकानूनी है। आइये जानते हैं इस बाइक के बारे में।

Manufacturer -Dodge
Parent company  - DaimlerChrysler AG
Production - 9 units total, 2003–2006
Class Concept vehicle
Engine -   8.3 L (506.5 cu in) 20-valve 90° V-10
Power  -  500 hp (370 kW) @ 5600 rpm (claimed) (45 kW:L power:displacement ratio)
Torque  - 525 lb·ft (712 N·m)
Transmission -  2-speed manual
Suspension Front -  Horizontal double fork
Brakes Front- 2×16 piston discs, Rear: 8 piston disc
Tires Front - 20"×4", Rear (2): 20"×5"
Wheelbase- 76 in (1,900 mm)
Dimensions L- 102 in (2,600 mm)
W - 27.7 in (700 mm)
H-36.9 in (940 mm)
Seat height -29 in (740 mm)
Weight- 1,500 lb (680 kg) (claimed)
( wet )
Fuel capacity - 3.35 US gal (12.7 l; 2.79 imp gal)
  

सोमवार, 20 नवंबर 2017

जो अनाज हमारा पेट भरता है लोग उसी को बासी रखना गलत कहते है आखिर क्यों

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है आज का हमारा टॉपिक है आटा जो हमारा पेट भरता है। लेकिन अगर कोई आपसे कहे कि आटा भूतो को निमंत्रण देता है तो आप उसको बेवकूफ ही समझेंगे आइये जानते है कि धर्मशास्त्र आटा के लिए क्या कहता है।

भूत-प्रेतो को निमंत्रण देता है घर के फ्रिज में रखा हुआ आटा । वर्तमान में बहुत सी गृहिणियां खाना बनाते समय रात को बचा हुआ अतिरिक्त आटा गोल लोई बनाकर उसे फ्रिज में रख देती है और उसका प्रयोग अगले दिन करती है। कई बार सुबह के समय भी आटा बचने पर ऎसा ही किया जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार गूंथा हुआ आटा पिण्ड माना जाता है जिसे मृतात्मा के भक्षण के लिए अर्पित किया जाता है। जिन भी घरों में लगातार या अक्सर गूंथा हुआ आटा फ्रिज में रखने की परंपरा बन जाती है वहां पर भूत, प्रेत तथा अन्य ऊपरी हवाएं भोजन करने के लिए आने लग जाती है। इनमें अधिकतर वे आत्माएं होती है जिन्हें उनके घरवालों ने भुला दिया या जिनकी अब तक मुक्ति नहीं हो सकी है। ऎसी आत्माओं के घर में आने के साथ ही घर में अनेकों समस्याएं भी आनी शुरू हो। जाती हैं।। बचे हुए आटे को इस तरह रखने वाले सभी। घरों में किसी न किसी प्रकार के। अनिष्ट देखने को मिलते हैं। वहां। अक्सर बीमारियां, क्रोध, आलस आदि बने। रहते हैं और घर में रहने वालों की भी। तरक्की नहीं हो पाती है।

शास्त्रों के अनुसार ऎसे किसी भी चीज को घर में स्थान नहीं देना चाहिए। जो मृतात्माओं का भोजन हो अथवा। उन्हें किसी भी प्रकार से आमंत्रित। करने की क्षमता रखती हो। इसके ही रात। के बासी बचे आटे से रोटी बनाना शरीर। के लिए भी नुकसानदेह होता है। ऎसा। भोजन तामसिकता को तो बढ़ावा देता। ही है साथ में शरीर को भी रोगों का घर। बना देता है जबकि ताजा बना भोजन शरीर। को स्फूर्ति, शक्ति और स्वास्थ्य। देता है। इन सभी चीजों को देखते हुए

हमें घर में बासी आटा नही रखना चहिये ।

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दुनिया में एक देश ऐसा है कि जिसका राष्ट्रीय ध्वज न चौकोर है और न ही आयताकार। इसके राष्ट्रीय ध्वज की क्या विशेषतायें हैं

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